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Exclusive: ‘घमासान’ में STF चीफ बनने में छूटे पसीने, प्रतीक गांधी ने बताया सबसे बड़ा चैलेंज, बोले- पहले कभी ऐसा रोल नहीं किया

 Written By: Jaya Dwivedie
 Published : Sep 09, 2026 02:28 pm IST,  Updated : Sep 09, 2026 02:28 pm IST

प्रतीक गांधी ने India TV से खास बातचीत में ‘घमासान’ में अपने STF चीफ के किरदार को चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने वास्तविक लोकेशन, हार्टलैंड की भाषा-संस्कृति और कहानी की प्रासंगिकता पर भी चर्चा की।

pratik gandhi- India TV Hindi
प्रतीक गांधी। Image Source : ZEE 5 YOUTUBE

अभिनेता प्रतीक गांधी अपनी हर भूमिका में कुछ नया तलाशने के लिए जाने जाते हैं। अब वह फिल्म ‘घमासान’ में एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं, जो उनके पिछले किरदारों से काफी अलग है। India TV से एक्सक्लूसिव बातचीत में प्रतीक गांधी ने फिल्म में अपने किरदार और शूटिंग के अनुभव को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इससे पहले वह ‘द ग्रेट इंडियन मर्डर’ में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा चुके हैं, लेकिन ‘घमासान’ का किरदार उनके लिए पूरी तरह अलग चुनौती लेकर आया। प्रतीक गांधी ने बताया कि फिल्म में वह एक STF चीफ की भूमिका निभा रहे हैं। कहानी देश के हार्टलैंड यानी ग्रामीण और जमीन से जुड़े इलाके में स्थापित है, जहां परिस्थितियां और पुलिस व्यवस्था का माहौल काफी वास्तविक रखा गया है। अभिनेता के मुताबिक किरदार को किसी सामान्य फिल्मी पुलिस अफसर की तरह पेश नहीं किया गया है। उसकी दुनिया, व्यवहार और काम करने का तरीका काफी वास्तविक है। यही वजह है कि उनके लिए यह भूमिका खास बन गई, क्योंकि इससे पहले उन्होंने इस तरह के अधिकारी का किरदार नहीं निभाया था।

STF चीफ की बॉडी लैंग्वेज ने किया चुनौतीपूर्ण

बातचीत में जब प्रतीक गांधी से पूछा गया कि फिल्म के दौरान ऐसा कौन सा हिस्सा था, जिसने उन्हें बतौर अभिनेता सबसे ज्यादा चुनौती दी तो उन्होंने किरदार की फिजिकलिटी और उसके व्यवहार का जिक्र किया। उनके मुताबिक STF चीफ किस तरह अपनी टीम को लीड करता है, मुश्किल हालात में उसका रवैया कैसा रहता है और उसके व्यक्तित्व में किस तरह का अनुशासन दिखाई देता है, इन सभी चीजों पर उन्हें खास ध्यान देना पड़ा। प्रतीक ने बताया कि इस किरदार को सिर्फ संवादों के जरिए निभाना पर्याप्त नहीं था। एक STF अधिकारी की बॉडी लैंग्वेज, टीम को संभालने का तरीका और उसका पूरा डेमीनर यानी व्यक्तित्व पर्दे पर विश्वसनीय नजर आना जरूरी था। इन बारीकियों को पकड़ना उनके लिए अभिनय की बड़ी चुनौती रही।

असली जगहों पर शूटिंग ने बदला अनुभव

प्रतीक गांधी के मुताबिक ‘घमासान’ की शूटिंग पूरी तरह वास्तविक लोकेशंस पर की गई। उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि असली जगहों पर काम करने से फिल्म की दुनिया को समझने और किरदार में उतरने में काफी मदद मिली। फिल्म जिन सच्ची घटनाओं के संदर्भ से जुड़ी है, उनके बारे में हुई बातचीत, हार्टलैंड का वातावरण, स्थानीय भाषा और वहां की संस्कृति को समझना भी उनके लिए अहम रहा। प्रतीक के अनुसार इन सभी पहलुओं ने उन्हें न सिर्फ अपने किरदार को बेहतर तरीके से समझने में मदद की, बल्कि फिल्म की पूरी दुनिया को महसूस करने का मौका दिया।

पुरानी घटना, लेकिन आज भी प्रासंगिक है कहानी

‘घमासान’ को लेकर प्रतीक गांधी का मानना है कि फिल्म मौजूदा दौर में भी महत्वपूर्ण है। भले ही फिल्म की कहानी जिस घटना से प्रेरित है, वह काफी समय पहले हुई थी, लेकिन उसके पीछे छिपे कई संदर्भ आज भी प्रासंगिक हैं। अभिनेता को उम्मीद है कि दर्शक फिल्म के कई पहलुओं को आज की परिस्थितियों से जोड़ पाएंगे। उनका मानना है कि अच्छी कहानी सिर्फ अपने दौर की बात नहीं करती, बल्कि समय बीतने के बाद भी लोगों को सोचने के लिए मजबूर करती है। प्रतीक चाहते हैं कि ‘घमासान’ देखने के बाद दर्शक फिल्म की घटनाओं और उनसे जुड़े मुद्दों पर बातचीत करें और अपने नजरिए से उन्हें समझें।

Zee 5 पर रिलीज से बढ़ेगा फिल्म का दायरा

अब ‘घमासान’ के ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee 5 पर स्ट्रीम होने को लेकर भी प्रतीक गांधी काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि डिजिटल रिलीज के जरिए फिल्म को कहीं ज्यादा बड़ा और विविध दर्शक वर्ग मिल सकता है। उन्होंने बताया कि हिंदी Zee 5 की पहुंच भारत के महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों और कस्बों तक भी है। प्रतीक के मुताबिक टियर-2 और टियर-3 शहरों में हिंदी कंटेंट की मजबूत पहुंच फिल्म के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इसके अलावा Zee 5 की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धता के कारण फिल्म दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले दर्शकों तक भी पहुंच सकेगी। प्रतीक गांधी को उम्मीद है कि ‘घमासान’ सिर्फ एक क्राइम या पुलिस ड्रामा के तौर पर नहीं देखी जाएगी, बल्कि इसकी कहानी दर्शकों के बीच गंभीर बातचीत भी शुरू करेगी। उनके लिए STF चीफ का किरदार निभाना एक नया अनुभव रहा है और अब वह चाहते हैं कि दर्शक भी इस अलग दुनिया और कहानी को उसी गंभीरता के साथ महसूस करें। बातचीत में प्रतीक की बातों से साफ है कि ‘घमासान’ उनके लिए महज एक और प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि ऐसा किरदार है जिसके जरिए उन्होंने अभिनय के एक नए क्षेत्र को एक्सप्लोर किया है। वास्तविक लोकेशन, सच्ची घटनाओं का संदर्भ और हार्टलैंड की भाषा-संस्कृति ने इस अनुभव को उनके लिए और खास बना दिया।

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